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Friday, February 10, 2017

Manusmriti ka sach


Manusmriti ka sach

एक आरोप ये भी लगाया जाता है कि जब ब्राह्मणों का वर्चस्व खत्म होने लगा तो उस वक़्त ब्राह्मणों ने मनुस्मृति लिख डाली, जबकि मनु जी द्वारा लिखित यह पुस्तक बहुत ही प्राचीन है। 'महाभारत' में महाराजा मनु की चर्चा बार-बार की गई है (महाभारत अनुशासन पर्व और शांतिपर्व देखें), किंतु मनुस्मृति में महाभारत, कृष्ण या वेदव्यास का नाम तक नहीं है आखिर क्यों ? महाभारत का रचनाकाल 3150 ईसा पूर्व अर्थात आज से लगभग 5,165 वर्ष पूर्व का माना जाता है। '

आधुनिक शोध के अनुसार श्रीराम का जन्म 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व हुआ था अर्थात आज से 7,128 वर्ष पूर्व। महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण (वाल्मीकि रामायण 4-18-30, 31, 32 देखें) में मनुस्मृति के श्लोक व महाराज मनु की प्रतिष्ठा मिलती है आखिर कैसे ?

महाभारत और रामायण में ऐसे कुछ श्लोक हैं, जो मनुस्मृति से ज्यों के त्यों लिए गए हैं। अतः ऐसा सिद्ध होता है कि मनु महाराज श्रीकृष्ण और श्रीराम से पहले हुए थे और उनकी मनुस्मृति उन्हीं के काल में लिखी गई थी।

सन् 1932 में जापान के एक बम विस्फोट द्वारा चीन की ऐतिहासिक दीवार का एक हिस्सा टूट गया था। टूटे हुए इस हिस्से से लोहे का एक ट्रंक मिला जिसमें चीनी भाषा में एक प्राचीन पांडुलिपियां भरी हुई थीं। ये पांडुलिपियां सर आगस्टस रिट्ज जॉर्ज (Sir Augustus Fritz) के हाथ लग गईं और उन्होंने इसे ब्रिटिश म्यूजियम में रखवा दिया था। उन पांडुलिपियों को प्रोफेसर एंथोनी ग्रेम ( Prof. Anthony Graeme) ने चीनी विद्वानों से पढ़वाया तो यह जानकारी मिली...

चीन के राजा ‍शी लेज वांग (Chin-Ize-Wang) ने अपने शासनकाल में यह आज्ञा दी कि सभी प्राचीन पुस्तकों को नष्ट कर दिया जाए। इस आज्ञा का मतलब था कि कि चीनी सभ्यता के सभी प्राचीन प्रमाण नष्ट हो जाएं। तब किसी विद्याप्रेमी ने पुस्तकों को ट्रंक में छिपाया और दीवार बनते समय चुनवा दिया। संयोग से ट्रंक विस्फोट से निकल आया।

चीनी भाषा के उन हस्तलेखों में से एक में लिखा है ‍कि मनु का धर्मशास्त्र भारत में सर्वाधिक मान्य है, जो वैदिक संस्कृत में लिखा है और 10,000 वर्ष से अधिक पुराना है तथा इसमें मनु के श्लोकों की संख्या 630 भी बताई गई है। ...किंतु वर्तमान में मनु स्मृति में 2400 के आसपास श्लोक हैं। इसका मतलब आप समझ लीजिए मनुस्मृति को बदनाम करने के लिए और हिंदुओं में फुट डालने के लिए कितने श्लोक मिलाए गए हैं।

इस दीवार के बनने का समय लगभग 220 से 206 ईसा पूर्व का है अर्थात लिखने वाले ने कम से कम 220 ईसा पूर्व ही मनु के बारे में अपने हस्तलेख में लिखा। 220+10,000= 10,220 ईसा पूर्व मनुस्मृति लिखी गई होगी अर्थात आज से 12,234 वर्ष पूर्व मनुस्मृति उपलब्ध थी।

धर्मशास्त्रीय ग्रंथकारों के अतिरिक्त शंकराचार्य, शबरस्वामी जैसे दार्शनिक भी प्रमाणरूपेण इस ग्रंथ को उद्धृत करते हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि परंपरानुसार यह स्मृति स्वायंभुव मनु द्वारा रचित है, वैवस्वत मनु या प्राचनेस मनु द्वारा नहीं।

स्वायंभुव मनु 9057 ईसा हुए थे। ये भगवान ब्रह्मा की दो पीढ़ी बाद हुए थे, याने 10000 साल प्राचीन पुस्तक है ये... और इसकी सही प्रति लेना हो तो वो कहीं भी ना मिले पर फिर भी गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पुस्तक ठीकठाक है।

सिंह_पुरुष_श्री_राम --- ( रामायण - भाग 15 )


#सिंह_पुरुष_श्री_राम --- ( रामायण - भाग 15 



राम के सामने अभी विकट  परीक्षा है , एक और  मारीच ने यज्ञ की तरफ  मांस का टुकड़ा फेंक दिया है , और दूसरी और वायु की गति से राम की और खडग लेकर  दौड़ा।

निमिष मात्र में अब शरीर और मस्तिक को एक साथ काम करना था , राम ने कान तक धनुष की प्रतनच्या तान एक साधारण बाण मारा , बाण ने शक्तिशाली पक्षी के समान झपटते हुए उस मांस खड़   को यज्ञ वेदी से बहुत दूर उसे वायु में ही रोक दिया।

 किन्तु मारीच ---- राम ने तूणीर से दूसरा बाण खींचा और लाघवपूर्ण इसे कम  अंतराल में चला दिया।   मानो दोनों बाण साथ साथ ही छोड़े  गए हो , किन्तु मारीच को लगते ही राम समझ गए की यह  बाण मारीच के लिए उपयुक्त नहीं , वह शीतेसु  नामक मानवास्त्र था , साधारण मनुष्य के लिए यह अस्त्र यम का दूत था , किन्तु मारीच जैसे बलवान राक्षस के लिए कदाचित इसकी शक्ति अप्रयाप्त थी।

सितेषु ने मारीच की छाती पर आघात किया ,  राम लक्ष्य से सुई की नोक पर भी नहीं भटका था , वह जानता था , की कौनसा अस्त्र उसे कहाँ छोड़ना है।   लंबी चीख निकलते हुए मारीच झाड़ियो में जा फंसा।

कुछ समय राम ने मारीच की प्रतीक्षा की ,  किन्तु उसके लौटने का अब कोई चिन्ह नहीं था , सुबाहु ने भी अब आक्रमण का कोई  प्रयत्न  नहीं किया ,  वह भोच्चका होकर राम मारीच युद्ध देख रहा था , इससे पूर्व उसने किसी मानव को राक्षसों के विरुद्ध युद्ध करते नहीं देखा था , वह मारे भय के मारीच के लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था।  किन्तु मारीच के लौटने का कोई आभास  नहीं था , या तो वह मर चुका था , या  गंभीर घाव खा कहीं पड़ा था ,  सुबाहु अपनी स्तिथि के प्रति सजग हुआ , जहाँ वह आश्रम में अपने शत्रुओ से घिरा हुआ था ,  सामने राम थे , और दूसरी और लक्ष्मण।  लक्ष्मण बच्चा था , किन्तु राम साधारण मानव नहीं थे।  उन्होंने ताड़का और मारीच जैसे राक्षसों को मार गिराया था।

 राम अपने तीसरे बाण के साथ  अब प्रस्तुत थे  , इस बार वे संयोग पर निर्भर नहीं थे ,  चयन का अवसर मिल गया था , उन्होंने इस बार [ पर आग्नयस्त्र  धारण किया , इस अस्त्र का प्रहार सुबाहु नहीं झेल सकता , यह राम जानते थे।

सुबाहु ने अपना खड्ग तान राम की और दौड़े , ह

 इस बार राम को कोई  जल्दी नहीं थी ,  पूर्ण योजना के अनुसार राम ने धनुष ताना और तीर  अग्निअस्त्र छोड़ दिया ,

 यह तीर भी सीधा सुबाहु की छाती पर जाकर लगा , रक्त का उत्स फूटा , सुबाहु का शरीर निमिष-भर काँपा और पृथ्वी  गिर पड़ा , उसकी गर्दन तनिक सी हिली माथे पर पीड़ा की रेखाएं प्रकट हुई , और मुह से रक्त बह  निकला ,  मरते हुए पशु के समान  वह पीड़ा में डकराया  और उसने अपना निष्चेश्ट शरीर भूमि पर टेक दिया।

राम ने मारीच के आने की प्रतीक्षा की , पर मारीच कहीं दिखाई नहीं  दे रहा था ,

इधर राक्षसों की सेना ने लक्ष्मण पर आक्रमण कर दिया , अपने स्वाभाव के अनुसार कदाचित उन्होंने गुप्त प्रहार किया , किन्तु लक्ष्मण अपनी टोली के साथ पूर्णतः सावधान थे , राक्षस  लगभग वैसे ही भयंकर थे , जैसे मारीच और सुबाहु थे , किन्तु आकर में थोड़े छोटे थे , और उनके शरीर पर महंगे आभूषण भी नहीं थे।

 उन्होंने आक्रमण के साथ ही  मारीच और सुबाहु का परिणाम भी देख लिया  था , मुख पर क्रूरता तथा भय दोनों व्याप्त था , भय से मुक्त होने के लिए वह जोर जोर से चिल्ला रहे थे , व्यव्हार में आक्रमक होने का प्रयत्न  कर रहे थे , किसी निश्चित योजना के हिसाब से व्याकुल होकर इधर उधर भाग रहे थे ,

लक्ष्मण चुन चुन कर राक्षसों को मार रहे थे ,  राक्षशो की संख्या लगातार कम हो रही थी ,  आज सभी आर्य एक  होकर राक्षसों का सामना कर   रहे थे , और एकता के बल का परिणाम भी उनके सामने था।

#महाभारत ---- भाग - 2 #गाथा_निर्मोही_की


#महाभारत ---- भाग - 2  #गाथा_निर्मोही_की
                                           
                                    
देवव्रत सत्यवती को लेकर अपने प हस्तिनापुर लौट चुके है ,  अब आगे ----

सांतनु ने एक लंबे असुविधाजनक मौन के बाद कहा , और सायास ही  देवव्रत की और देखा ,  उन्हें लगा की वह सहज देवव्रत की और नहीं देख पाएंगे , किन्तु  मुह मोड़कर भी वो शांत नहीं रह पाएंगे , वस्तुतः देवव्रत से उनका सम्बन्ध नहीं रहा , जो आज  तक था , उन्होंने अपने इस पुत्र को नहीं जाना था , उन्हे तो केवल समय समय पर यही सुचना मिलती थी  की गंगा का एक पुत्र भी है , जो गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त कर एक यौद्धा   बन रहा है।  गंगा की गौद  में एक नन्हा शिशु था , सांतनु को तो उससे प्रेम था ,  वे उसे अपना पुत्र मानकर प्रेम करते थे , दरअसल यह प्रेम था ही नहीं  मोह था।   उस शिशु से मोह था , जिसका नाम देवव्रत था , किन्तु इस  देवव्रत को तो कभी उसके पिता ने समझा ही नहीं।

 सत्यवती को देखने के बाद , उसकी शर्ते सुनने के पश्चात  सांतनु को लगा की उनका कोई पुत्र है ही क्यू , अगर  उसी समय इसे भी मरने दिया होता , तो आज में आराम से विवाह कर सकता था , सांतनु को लगा की देवव्रत उनका परमसुख छीनने ही आया है।

सांतनु ने काम के वेग को तो पहचान लिया , किन्तु देवव्रत को नहीं पहचान पाए , उन्होंने गंगा के जाने के बाद बस अपनी उग्रता को दबा रखा था , किन्तु सत्यवती  की सुंदरता ने उस उग्रता को शांत कर दिया था।  सत्यवती के सौन्दर्य के आगे सांतनु का वास्तविक चरित्र सामने आ गया था।

 और तब  सांतनु को लगा की गांगेय जैसा मेरा कोई पुत्र है ही क्यू ?? अगर उनका कोई पुत्र ना होता तो वह बिना किसी विरोध के सत्यवती से विवाह कर सकते थे ,  विबाह को उनकी आवश्यकता ही नहीं , उनका धर्म भी माना जाता ,  उन्हें लगा गंगा को जाना ही था  , इसीलिए तो वह उन्हें पुत्रो से मुक्त करना चाहती थी , ताकि एक  दूसरे के विवाह में असुविधा ना रहे ,  वे व्यर्थ के मोह में ही फंस गए थे।

 सांतनु को लगा की पुत्र  केवल सुख का  कारण नहीं होता , कभी कभी यह आपके जीवन की सबसे बड़ी बाधा  बन जाता है , उन्हें लगा की देवव्रत ने उन्हें कामाग्नि के झरने के निचे  खड़ा कर दिया है , जहाँ अब उन्हें नित्य जलना ही है।

 मगर आज उनके सामने जो गांगेय बैठा था , वह कितना समर्थ , और कितना बड़ा त्यागी है ,  जैसे कोई  बच्चा जब एड़िया रगड़ रगड़ कर किसी चीज़ की जिद करता है , और समर्थ पिता उसकी जिद पूरी करता है ,  इस बात की चिंता किये बिना की इस वस्तु का मूल्य क्या है , किन्तु आज पुत्र ने ने पिता की  इस जिद को पूरा किया था , ऐसा इतिहास में पहले कभी हुआ ही नहीं था , सृस्टि के नियम के विरुद्ध जाकर  देवव्रत ने अपने जीवन के सारे सुखो को बेचकर अपने पिता की इच्छा पूरी की थी।



 तुमने जो प्रतिज्ञा की है गांगेय    . सांतनु बड़े कठिनाई से बोले , यह सरल नहीं असंभव प्रतिज्ञा है , तुमने भीषण कर्म किया है , मै  तुम्हे क्या दे सकता हूँ पुत्र तुम जैसे पुरुष को कोई क्या दे सकता है ??  मुझे लगता है , तुम्हारा जन्म कुछ लेने के लिए हुआ ही नहीं है ,  तुम आजीवन दोगे  , लोग याचक होंगे , और तुम दाता  होंगे।  जीवन  तुमको कभी कुछ नहीं देगा , हमेशा तुमसे पायेगा ही पायेगा ,  मेने तुम्हे कभी नहीं पहचाना पुत्र , आज मेने तुम्हे देखा है।

 मै  इस अवसर पर तुम्हारा नया नामकरण कर रहा हूँ

तुम इस प्रतिज्ञा के कारण भीष्म कहलाओगे।

देवव्रत ने अपने पिता की और देखा , " मेने केवल अपना पुत्र धर्म निभाया है आर्य।

सांतनु की आँखे डबडबा  गयी , एक ही दृस्टि के भीष्म को देखते रह गए ,  " तुमसे पुत्र पाने की कामना हर पिता करेगा  " सांतनु भारी  गले के कारण   बहुत मुश्किल से अपनी बात कह पा रहे थे ,  तुमसे  कोई पुत्र होता है , तो पिता केवल पुत्र पर गर्व कर सकता है , स्वम् अपने आप पर भी गर्व करने का सहस वह नहीं जुटा  पाता।

 तुम भीष्म हो पुत्र , पूरा संसार तुम्हे भीष्म के नाम  से जानेगा  .

Samvidhan 1

भारत का संविधान ---  ( हिन्दूओ के चारो वर्णो के लिए कितना खतरनाक )

मेने जैसे भारत के संविधान को कुरआन का ही लेटेस्ट वजर्न कहना शुरू कर  दिया है , दरअसल  मेरा मानना तो यह है , की इस्लाम को भारत में विशेषाधिकार देने की जगह , कुछ कम  अधिकार उन्हें अन्यो से  कम देने चाहये थे , जिससे हिन्दुओ  की आजादी के बाद भी उनके ही देश में  इतनी जाने नहीं जाती ।।

विभाजन हो चुका था ,   विभाजन से पहले भारत  के हिन्दू देश के लिए लड़ रहे थे , और मुसलमान  पाकिस्तान के लिए , जिन इक्के दुक्के मुसलमानो ने अगर स्वतंत्रता संग्राम में प्राण भी दिए , तो उसके एवज में भारत  माँ की भुजाएं तोड़ दी , मुसलमानो के कारण भारत माँ का मुकुट उनसे छीन  गया , फिर भी ना जाने क्यू इस देश के कांग्रेसी नेताओ ने उन्हें अधिकार पर अधिकार देते  दिए।

 यह सब फ़ालतू की बकवास है की अंग्रेजो ने भारत के टुकड़े करवा दिए , अबी कश्मीर में कौनसे अंग्रेज है , या बंगाल में है ??  यह तो इस्लाम का परम कर्तव्य है , जिस देश में भी रहना उसे गई खंडित कर देना , चाहे चीन हो यूरोप , हर देश को मुसलमानो ने तोडा ही है , इनकी कुरआन में देशभक्ति हराम है।

भारत की न्यायपालिका बार बार यह आदेश दे कि  चुकी है की धार्मिक, आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता , किन्तु यहाँ न्यायलाय के सम्मन करने वालो की नानी मर जाती है , न्यायलाय कहती है की किसी भी प्रकार से छल  कपट या धन का लालच देकर धर्म परिवर्तन नहीं करवाया जा सकता , किन्तु उड़ीसा में लगातार यह काम जारी था..... इस कहानी की चर्चा आगे ---

धारा  ३७० को लेकर मुहम्मद जवाहर लाल नेहरू ने कहा की यह घिसते घिसते मिट जायेगी , यह धारा  अस्थायी रोप से लागू हुई थी , किन्तु आज इसने इन्ही मुसलमानो के दबाव के कारण  स्थायी रूप ले लिया है।  आखिर मुस्लमान जो भारत के अन्य  राज्यो में रहे है , क्यू कश्मीरियो को नहीं दुत्कारते , उनकी   गद्दारी के लिए , वो यह नहीं कर सकते , क्यू की गजवा- ए - हिन्द की हदीस के अनुसार अभी अगला विभाजन का नम्बर कश्मीर ही है , भारत के अन्य राज्य भी इनके इस गजवे के कारण सुरक्षित नहीं , किन्तु मुस्लमान कभी इस गजवे की चर्चा कर यह नहीं कहते  की युवाओ को ऐसे गजवो से बचना चाहिए , बल्कि मदरसा आदि में तो पढ़ाया ही यह गजवा ही जाता है।

क्या पढ़ते है मदरसा में  जाकर ??? कुरआन !!  ---- जो सिर्फ हिन्दुओ के कत्लेआम का आदेश देती है , आखिर क्या साबित करना चाहती थी सरकारे , मदरसा को इतनी बढ़ोतरी देकर  ???

संविधान और मुसलमानो ने हिन्दुओ और पीड़ित हिन्दुओ को (जो की खुद को दलित कहते है)  उन्हें अपनी पाँव की जूती  बनाकर रख दिया है , मुझे तो सबसे ज़्यादा हैरत तब होती है , जब भीमरत्ते  मुसलमानो का साथ देते है , उन्हें नहीं पता मुलनिवाशियो , यह बांग्लादेश और पाकिस्तान भी कभी तुम लोगो का ही था ।। और अब भी आप सुरक्षित हो तो इन्ही यूरेशिया वाले लोगो की वजह से ।।

 एक मुसलमान चित्रकार ने बेशर्मी की हदे पार  करते हुए , हिन्दू देवी देवताओ की नग्न तस्वीरे बना दी , किन्तु उसने आएसा और मुहम्मद की तस्वीरे क्यू नहीं बनायी ???  यह मुसलमान सिर्फ हिन्दुओ को अपमानित करने , या उनको आहात करने ही भारत की भूमि पर आज तक है।

इस देश को चंद  लोगो ने मुसलमानो के हाथों बेच खाया है , आखिर जब आप्किस्तान बन ही गया था , तो क्यू हिन्दुओ का गला कटवाने पहले तो इन्हें रखा , उसके बाद सारे अधिकार भी इन्हें दे दिए।   यह धोखा आज हिन्दुओ का जीना हराम कर चुका है , हर जगह भारत में कोने कोने पर मुसलमानो के द्वारा हिन्दुओ को प्रताड़ित किया जा रहा है, धूलागढ़ से मालदा , या कश्मीर , अगर कुछ दिन हम ऐसे ही रहे तो भारत की पावन भूमि से संतो की वाणी गायब हो जायेगी , मंदिर टूट कर मस्जिद बन जाएंगे , ना हमारा अस्तित्व बचेगा , ना रामायण बचेगी , ना वेद।   गुरुग्रंथ साहिब क्या तुम रख सकोगे , सरदारो ???

 कहीं यह सेककलर राजनीती या विशेषाधिकार कानून संविधान के नाम पर हिन्दुओ से गद्दारी तो नहीं ???  यहाँ भी क्या सिरिया की तरह बारूद की गंध, गोलियों की तडातड , वाले सिद्धांत राजनीतिज्ञ और संविधान चाहता है ???

भारत के हिन्दुओ को अपने ही देश में साम्प्रदायिक कह अपमानित किया जाता है , किन्तु क्या मुसलमानो के राज आने के बाद यह आजादी इन टीवी एकंकार को भी मिलेगी , जो आज धर्म के नाम की इतनी  लंबी चौड़ी  व्याख्या करते है।

भारत में इस्लाम तो इस कदर हावी हो गया था , कांग्रेस के समय में, की विदेशनीति भी मुसलमानो की भावनाओ को धयन में रखकर बनायी जाने  लगी थी , विदेश नीति का निर्धारण  प्रत्येक देश अपने राष्ट्र के हित  के लिए करता है , इसके उल्ट भारत में मुसलमानो के हित  और भावनाओ को ध्यान में रखकर विदेशनीति बनाई जाने लगी , ईरान के विरुद्ध परामाणु परीक्षण के खिलाफ मुसलमनो ने वोट नहीं देने दिया , उस समय मनमोहन की सरकार  हुआ करती थी ,
सभी जानते है , ईरान कितना गैरजिम्मेदार देश है।

दूसरी एक घटना तो और खतरनाक है ------ भारत की सरकार कुछ ससमय से मुस्लिम देशो के संगठन में शामिल होने के लिए आवेदन करने लग गयी थी , निवेदन की बेशर्मी इस  कदर है , की अगर स्थायी नहीं , तो अस्थायी सदस्यता ही भारत को दिया जाए.  जागो हिन्दू जागो

आज पाकिस्तान और बांग्लादेश में देखे तो सभी मुस्लमान ही है , तो क्या यह हमारी आअधय्त्मिक हार नही हम हिन्दुओ की ???

हम अब भी कब जागेंगे यह ईश्वर जाने

क्रमश: ---

रामायण ----- ( #सिंह_पुरुष_श्री_राम )

रामायण -----  ( #सिंह_पुरुष_श्री_राम )

ताड़का वध के बाद राम की अद्भु वीरता का यश चारो और फेल चुका है ,  विश्वामित्र अब  जनसभा को संबोधित करने आये , की  आज  तक राक्षसों से केवल हमारा संघर्ष चल रहा था , अब युद्ध की घोषणा हो चुकी है , यह युद्ध केवल राम को नहीं , प्रत्येक देशवाशी  को लड़ना है , अब में यह नहीं कह सकता की राक्षसों का आक्रमण रात्रि में होगा या दिन में , किन्तु हमें इसी समय से पूर्ण सावधान रहना होगा।  जिसके पास जो भी शस्त्र  हो उसे वह धारण करें , और जिसके पास सस्त्र नहीं है , वो  शस्त्र का स्वम् निर्माण करें या म्रत्यु के लिए सज्ज रहे , क्यू की राक्षसो को शाश्त्र नहीं , शस्त्र  ही समझ में आते है।

       विश्वामित्र ने एक शिष्य को कहा , की अब नगर नगर जाकर  लोगो को जागरूक करने का काम  तुम्हारा है --- ग्राम वालो को सुचना दो की ताड़का का वध हो चूका है , और बाकी के शाशको के विरुद्ध धर्मयुद्ध करने के लिए यथा शीघ्र पहुंचना है।

इसी बीच  राम बोले - गुरुदेव मुझे रात्रि के आक्रमण की कोई सम्भावना नहीं दिखती ,

सम्भावना सचमुच बहुत कम है राम  , किन्तु सावधानी तो आवयशक है ही , किन्तु आज से पहले आश्रम की यह अवस्था नहीं थी राम , आश्रम के आस-पास  राक्षस नर की बलि लेने , उनकी हड्डिया चबाने को घूमते ही रहते थे , आश्रम के आस-पास मदिरा की दुर्गन्ध आती थी , अब चारो और शांति है पुत्र , ना उनके आखेट के स्वर , और ना ही  उनके नृत्य का , ताड़का के वध के बाद वे भयभीत हो गए है , वे अत्याचारी है , वीर नहीं।

     गुरु अब वापस कुटिया की  पड़े , राम  आश्रम की  रक्षा करने के लिए कुटिया के बाहर ही खड़े रहे।

वहीँ एक १० वर्ष का ब्रह्मचारी ब्राह्मण बड़ी देर से राम  को आँखे भर भर के देख रहा था , राम ने उसे देखकर पुछा - क्या नाम है तुम्हारा बालक।

" सत्यप्रिय "

 राम हंसे - तुम तो सत्यप्रिय हो , युद्ध प्रिय तो नहीं , फिर युद्ध करने क्यू आये हो ?

बालक ने संकुचित होकर उत्तर दिया , आर्य में सत्यप्रिय हूँ , और ब्राह्मण हूँ , इसीलिए युद्ध करना अब मेरा कर्तव्य है , असत्यप्रिय होता , तो राक्षसों के भवनों में जाकर सुख से सो रहा होता।

 उस बालक के हाथ में केवल एक लकड़ी थी , राम ने  फिर पुछा , तो क्या इस लकड़ी से तुम राक्षसों  से कैसे लड़ोगे ??

मै  इसे जलाकर  राक्षसों की ढाढ़ीया झुलसा दूंगा ,

लक्षमण इतने समय चुप बैठे थे , किन्तु इस बार वे स्वम् को रोक नहीं सके , उन्होंने जोर का अट्टहास किया ,--- सत्यप्रिय यह युद्ध बड़ा ही मनोरंजक होने वाला है।  सारे राक्षस अपनी जलती दाढियो से व्याकुल  इधर उधर भागते हुए नज़र आएंगे।

 राम मंद मंद मुस्कुरा रहे थे

 सुबह जब गुरु स्नान करने आये , तो आश्रम का वातवरण ही बदल चुका था , आसपास के लगते सभी ग्रामो के लोग कुछ ना कुछ हथियार लेकर सैनिक रूप धारण कर चुके थे , यह वह लोग थे , जो गुरु के बार बार आह्वाहन करने पर भी घरो से निकलने को राजी नहीं थे , उन्होंने तो राक्षसों के डर  से अपने घरो को छोड़ छोड़ कर पलायन करना शुरू कर दिया था ,  राक्षस नाम सुनते ही जिनके मुह पिले पड़  जाते थे , वही आज राक्षसों से लड़ने को आक्रामक मुद्रा में बैठे थे।

 गुरुअपनी गरिमापूर्ण सहज गति से तेजी से आगे बढे , मध्य में बैठे राम और लक्ष्मण के पास पहुंचे ,

 राम तुमने चमत्कार किया है पुत्र -- यह शोषित और दलित प्रजा आज आर्य बन चुकी है , आज यह लोग कितने समर्थ लग रहे है , मै  आज मान गया हूँ , प्रजा ना तो कायर होती है न आलसी , पर उचित नेतृत्व का निरंतर अभाव उन्हें कायर और निर्बल बना देता है, और जनता अन्यायों के प्रति सहिष्णु हो जाती है ।  उचित नेतृत्व मिलते ही , ठन्डे गीले प्रदार्थ में आग लग जाती है , उसका तेज जाग्रत हो जाता है।

तुम समर्थ हो राम।  तुम समर्थ हो ------

आपकी ही महिमा है गुरुदेव , राम ने मस्तक झुकाते हुए नम्र  वाणी में कहा , अब आपसे एक प्रार्थना है , युद्ध का आह्वाहन  अब हम करे गुरुदेव में लक्ष्मण और सारी  प्रजा युद्ध के लिए सज्ज है गुरुदेव।  तबी एक संदेशवाहक ने कहा ---- गुरुदेव --- राक्षस अपने शिविर से  आश्रम की और निकलते दिखाई पड़  रहे है ,  राम और लक्ष्मण तुरंत चौकन्ने हो गए।

मारीच और सुबाहु ------ किसी ने टोली में से बिच में ही कहा ,

राक्षस बड़ी तेजी के साथ बढ़ते हुए आश्रम की और आ रहे है ,  तभी राक्षसों की टोली की नज़र राम पर पड़ी , उनकी लाल लाल  आँखे , मुछ  कटी  हुई ढाढ़ी , आँखे जैसे क्रोध के मारे निकालकर कटोरो की भांति हो चुकी थी ,

 विकत हुंकार कर मारीच ने मांस खंड उस और उन्चाल  दिया, जिस और विश्वामित्र अन्य ऋषियों के साथ  यज्ञ  कर रहे थे , और मांस का टुकड़ा उन्चालकर स्वम  राम की और खडक तानकर  भागा।

 राम के लिए  यह परीक्षा की घडी थी  , क्यू की उन्होंने  ऐसे मायावी राक्षसों का सामना कभी नहीं किया था , अगर मारीच को रोकते तो यज्ञ अपवित्र हो जाता ,  और मांस के टुकड़े को रोकते , तो मारीच खड्ग  से उनपर वार कर देता।

Samvidhan

संविधान ----- ---------- हिन्दुओ ( सभी चार वर्णो )के लिए कितना लाभदायक --

किसी भी देश को अगर तोडना हो --- तो उसमें टाइम लगता है,,, यह बात तो तय है " हिन्दू शब्द इतना मजबूत है, की इसपर इस्लाम कभी भी कोई प्रभाव नहीं डाल सका ।।
    मगर हम इसका दूसरा तथ्य देखे तो कभी अफगानिस्तान भी हिन्दू राष्ट्र ही था , लगभग पिछले 1000 वर्षों के अंदर ही वह मुस्लिम राष्ट्र बना,,, पाकिस्तान बांग्लादेश  भी इसी तरह इस्लामिक देश बने,  दूसरे शब्दों में भारत का बहुत बड़ा हिस्सा इस्लाम की भेंट चढ़ गया,  अब में जिसकी बात कर रहा हूँ, हो सकता है, की अगले 10 -20 साल में, यह 50 साल में, पूरा देश ही इस्लाम के भेंट चढ़ जाए ।। अगर ऐसा पूर्ण ना भी हो, तो यह तो तय है, की फिर से भारत के बहुत बड़े भूभाग पर कब्ज़ा हो जाए,,,, और फिर से वही खुनी बर्बर इतिहास की कहानी लिख दी जाए,,, आज हम अफगानिस्तान, पाकिस्तान की कहानियां पढ़ते है,,,, सम्भव है, शायद कभी , आसाम, बंगाल, केरल, उत्तरप्रदेश की भी यही कहानी पढ़े ।। की यह कभी हिन्दू राष्ट्र हुआ करते थे।। और यह कोई ज़्यादा विचार करने वाली बात नहीं है ---- यह पूर्ण सत्य है,,, अगर इस्लाम और बढ़ा, फैला, तो देश् का एक और विभाजन तय है, संभवतः पूरा देश् ही मुस्लिम राष्ट्र बन जाए ।

में हमेशा अपने युवाओं को डींग हांकते देखता हूँ, "  I love my country "  मुझे धरमः से पहले देश चाहिए  , तरह तरह की बड़ी बड़ी बकवास ।

क्या होता है देश् ।। कुछ भी तो नहीं, और देश तो छोटा बड़ा होता रहता है, बढ़ता है, कम होता है, तो क्या आपका देश को लेकर प्यार भी घटता बढ़ता रहेगा।।
      जैसा ऊपर लिखा है, और यह बात तो हर एक हिन्दू भी जानता है --- कि अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान, आधा कश्मीर इसी इस्लाम की वजह से खोया है ।। हिन्दुओ ने कौनसे टुकड़े करवाये देश् के,, यह आप पूरा इतिहास पढ़कर हमें बताइये ।। राजस्थान जैसे प्रदेश जिनका अपना खुद का ही तो शाशन था दिल्ली की कब सुनी राजस्थान के हिन्दुओ ने ??? मुगलकाल के भारत तक???  -- किंतु वहां के हिन्दू क्या मुक्ति संग्राम छेड़ कर रखे???

जिस तरह से इस्लाम में देश भक्ति हराम है,,, तो यह तो निश्चित रूप से होना ही है, की देश अभी और कई बार टूटना बाकी है  उन्हें तो  कुरआन के हिसाब से चलना ही है, कुरआन में लिखा है, मूर्तिपूजकों ( हिन्दुओ )  की हत्या हर मुसलमान का परमकर्तव्य  है ,, उसी कुरआन के उपदेशों को पूरा करने के लिए एक मुसलमान पैदा होता है, और उद्देश्य प्राप्ति की राह में मरना भी चाहता है ।।

आप क्या सोचते है??? इस्लाम बना, और भारत में लोग उसकी अच्छाइयां देखकर मुसलमान बने??? नहीं ।।

सर पे हतोड़े मार, गर्म चिमटे लगा,  माँ का सामने बेटी का बलात्कार, बेटे का कत्ल, घरों को जलाकर, खड़ी फसल बर्बाद कर, गले रेंतकर , छोटे बच्चो का अपहरण कर, ऊन्का खतना कर दिया, आज के  मुसलमान भले ही यह बात ना माने, की उनकी माताओ बहनो को बाल पकड़ कर,  जनानाखानों तक ज़बरदस्ती घसीटकर ही मुसलमान बनाया गया था, और यह केवल भारत में नहीं, विश्व का एक कौना भी ऐसा नहीं, जहाँ इस्लाम शांति के माध्यम से फैला हो,,, हर जगह केवल वही खुनी विभस्त इतिहास ।। जहाँ यह मुसलमान कम होते है, वहां बहुत शांति से रहते है---- जैसे  राजस्थान  9% के करीब वहां मुसलमान है, इसलिए इतना प्रेम है उनमें, की मुझे खुद इस्लाम कभी समझ ही नहीं आया, उल्टा कई बार तो में विश्वाश ही नहीं कर पाया,,,, की क्या ऐसा भी होता है ??

जिस धरमः के नाम पर हिन्दुओ की माता बहनो का शील  भंग हुआ, उनके बच्चो के गले रेंते गये, जिसके कारण हिन्दुओ का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान और बंगलादेश के रुप में परिवर्तित हो गया, अफगानिस्तान और बाकी अन्य देशों को गिन ही नहीं रहा ।।  जैसे तैसे इनसे हमें मुक्ति मिली ---- तो  हमें खत्म करने के लिए,,,, हिन्दुओ को खत्म करने के लिए,,, कुरआन का नया बर्जन संविधान लॉन्च हुआ ।। हो सकता है यह मेरे द्वारा कानून का उलंघन ही किया जा रहा हो, किन्तु में चुप नहीं रह सकता, में यह बार बार करुंगा।
घर की माँ बहनो की इज्जत, खुद और हिन्दुओ की जान से बढ़कर भी कोई कानून या संविधान है क्या ???

जी हां ---- भारत के संविधान ने भी आपके संपूर्ण विनाश की पूरी तैयारी कर ही रखी है ---------- अल्पसंख्यकों को  विशेषाधिकार देकर ।। यह अल्पसंख्यक है कौन---- यह हमारा संविधान हमें नहीं बताता ---- दूसरी और मुसलमानो के लिए अलग " शरीयत " कानून व्यव्यस्था का कानून बना,, पुरे भारत के हिन्दुओ के भविष्य वही  तय कर दिया, जो 1000 साल पहले था। आज बंगाल हो आसाम में हिन्दुओ की हत्या ---- उसका जिम्मेदार संविधान है और कोई नहीं ।।

यह कैसा देश है??? यहाँ एक आदमी चार विवाह कर सकता है??
जब चाहे अपनी पत्नी को तीन तलाक कह  तलाक दे सकता है??
40 बच्चे पैदा कर गरीबी, भीड़ और भुखमरी फैलाता है??

इसके उलट दूसरी और इंद्रा गांधी ,हिन्दुओ की नसबंदी करवा उन्हें कम से और कम करने का प्रयास करती है ।।। हम हिन्दुओ को अब तक समझ ही नहीं आया,,, की हमारे साथ आखिर हो क्या रहा है ।।

सिरिया  से लेकर सऊदी हो या अन्य कोई भी देश,, सारे कभी या तो यहूदी देश थे या ईसाई, वो कभी इस्लाम के लिए विरुद्ध लड़े भी थे,,, आज जो तुर्की है, जहाँ शत-प्रतिशत लोग मुसलमान है,  यह सब कुछ बोद्ध थे कुछ ईसाई ।। इस्लाम की ऐसी मार पड़ी, की आज बच्चा बच्चा यहाँ का मुसलमान है। और ऐसा मुसलमान जो पूरी दुनिया में ही अपना काला अँधेरा फैलाना जानता है।।

यह तुर्की लोग कभी बोद्ध हुआ करते थे, टेंगड़ी ऊन्का देवता था, जिसका मतलब होता है, धरती का राजा --- नीला आसमान और चंदसितारे उनके प्रतिक चिन्ह थे, जो आज तक तुर्की के झंडे पर है, और तुर्की शब्दकोष में अल्लाह का दूसरा नाम भी टेंगड़ी ही है ।।  उसी  टंगड़ी धरमः का ही चाँद सितारा है, जो मुसलमान गर्व से कहते है, यह हमारा है,, बल्कि सऊदी जानता है हक़ीक़त,,, की यह चाँद सितारा अपना नहीं है,,, इसलिए सऊदी के झंडे पर तलवार है ---- ना की यह चाँद सितारे, खुद चंगेज खान , इसी धरमः को मानने वाला था। टेंगड़ी देवता को।  

चीन इसीलिए तो इस्लाम से इतनी नफरत करता है,,,,,,, क्यू की तुर्किस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेक सब कभी यह चीनी साम्रज्य का हिस्सा थे, किन्तु मुसलमानो ने कुरआन की पवित्र रिवाज को निभाते हुए,,,, इस् देश को भी तोड़ दिया था ।। आज भी इनका हर देश में अपना मुक्ति संग्राम जारी है ।।

अब सवाल यह की, जब मेरे जैसा मामूली आदमी यह जानता है, की इस्लाम क्या चीज़ है, कुरआन क्या चीज़ है।। तो क्या यह बात संविधान लिखने वालों, या बाद में संसोधन करने वालो ने नहीं पढ़ी थी??? या वे इतिहास जानते नहीं थे???

सत्यबात यह है, की वास्तव में वो इस्लाम को जानते ही नहीं थे, और जो इस्लाम को जानते थे, वो खुद अंदर से मुस्लमान थे। जैसे जवाहर लाल नेहरू ,यहाँ  तक की खुद महात्मागांधी इस्लाम से प्रभावित था ---------- या मुसलमान ही था ।। क्यू महात्मागांधी ने कहा था, मेने कुरआन पढ़ी है, उसके बाद भी उसने मुसलमानो को सर पर बैठाकर रखा तो साफ़ है ------ महात्मागांधी मुसलमान ही था ।।

सबसे बड़ी बात यह गौर कीजिए ------ खिलाफत आंदोलन जो भारत में हुआ, उसमे महात्मागांधी का क्या काम था??? किंतु इसने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, क्यू की वो खुद एक मुसलमान था, और अपना धर्म निभा रहा था।। जैसे की कुरआन में कहा भी गया है, ज़रूरत पड़ने पर घात लगाकर बैठो, धोखा दो।। वही सब यह महात्मागांधी हम हिन्दुओ के साथ कर के चला गया ।।

आप मोबाइल में कुरआन लोड किजिए, 168 से ज़्यादा आयत है, जो आदेश देती है, मूर्तिपूजक (हिन्दुओ ) का या तो कत्ल करो, या धर्म परिवर्तन करवाओ,,, उनकी लड़कियों को काबू में करो, उनके मंदिर तोड़ो, और तोड़े भी ।।। यह सब आदेश कुरआन का है----मुसलमानो की इनमे विशेष गलती नहीं, वो तो केवल अपना धरमः निभा रहे है -----किंतु हम हिदुओ की मत क्यू मारी गई,,, की जब इन कातिलों को अधिकार दिए जा रहे थे, तो हम चुप थे, या आज भी चुप है,  सोचते है सिविल वार हो जायेगा।।। तो हो जाने दो ।।

वैसे भी हमारे तो आगे कुंवा पीछे खायी है ही ----मरने या मारने की ही तो नोबत आ गयी है ..  ।।। इस संविधान का सम्मान करते करते, हम खाक हो जाएंगे, क्यू की राख होना हमारे नसीब में ना होगा ।।

चलिए देखते है---- क्या किया इस कुरआन के नए वर्जन संविधान ने हमारे साथ एक नज़र ---

मुसलमानो को 25, 26 ,29, 30 धारा ---- धाराप्रवाह से हिन्दुओ के कत्लेआम का आदेश् देती है।। मेने यह इसलिए कहा है, की जहाँ मुसलमान बढ़ा, वहां हिन्दू कटा, लुटा, मरा ----- कश्मीर से लेकर मालदा, गोधरा, सब जगह इनकी मौत की झांकिया आज के युवा भी देख चुके है------ना जाने बेशर्म सेक्युलर हिन्दू गद्दार लोग, किस मुह से आज भी  सर्व-धरमः समभाव की बात करते है । तुम्हारे चक्कर में देश का सत्यानाश हो गया,,, सारे बलात्कार, हत्या और लूट के जिम्मेदार तुम ही हो।।। मुसलमानो की इसमें कोई गलती नहीं,,, ऊन्का तो काम ही यही है ।।

हज के लिए सब्सिडी दी जाती है ----- और मानसरोवर यात्रा पर टैक्स (जजिया )लिया जाता है ------ यह है मेरा हिन्दुराष्ट्र ???

अव्यबस्था  के नाम पर केवल हिन्दू मंदिरो का अधिग्रहण किया जाता है। क्या मस्जिदों से कभी कोई अव्यवस्था नहीं होती ??

हिन्दुओ के पर्सनल कोड़ में बार बार परिवर्तन होता है, पर क्या मुसलमानो के पर्सनल कोड में एक बार भी फेरबदल हुआ??? अभी करने की कोशिश की है, तो सारे मुसलमान इसपर एक हो गए है, क्यू की 40 बच्चे पैदा किये बिना, हिन्दुओ का कत्ल कैसे कर पाएंगे?? फिर भी बड़ी बेशर्मी के साथ हिन्दुओ को ही कट्टरवादी कहा जाता है ।।

जिन मुसलमानो ने 1000 साल भारत पर राज किया, फिर वो पिछड़े कैसे रह गए ???? क्या आजादी के बाद कांग्रेस ने ऊन्का सब कुछ लूट लिया था???  उसके लिए सच्चर कमिटी बनायी, की कैसे मुसलमानो का भला हो---- और हिन्दुओ के माल-और बीवी दोनों पर कब्ज़ा हो।। क्यू की इस्लाम फैला और हिन्दू कटा ।।

सऊदी अरब में हिन्दू राजदूत क्यू नही ??

इतना पढ़िए सोचिये---- बताइये ,,, आगे और भी लिखूं इसपर ??

हिन्दुओ की शौर्य गाथा ( प्रथम )

हिन्दुओ की शौर्य गाथा ( प्रथम )

इतिहास में पहली बार , जिसे मौत और हार का डर  ना हो , जीत उसके मुकद्दर में तय होती थी , जिसने ना केवल पूर्वोत्तर  में हिन्दू धर्म की रक्षा की , बल्कि मुगलो  के गरूर को भी कुचल डाला।

वो नाम था ------ the  legend of  lachit  Borphukan

भारत का वो हिस्सा जहाँ सूरज सबसे पहले दस्तक देता है , पूर्वोत्तर , जिसे आज हम आसाम कहते है , इसकी राजधानी हुआ करता था रोमपुर , शिवसागर , यहाँ मुग्लो की पैरवी करते हुए मीर जुमला ने राजा जयधरत सिन्हा को परास्त कर किया , इस दुख  में उनकी अकाल म्रत्यु हो गयी ,जिसके पश्चात् चक्रध्वज  सिन्हा विराजमान हुए , जिन्होंने अपने राज्य के प्रधानमंत्री अतुन बोरा गुहाई  , जो बेहद चतुर और हर काम में निपुण एक कूटनीतिज्ञ  के साथ मिलकर नए दुर्गों का निर्माण किया , अपनी सेना को संगठित बनाने के लिए उन्होने वीर योद्धा  लासित वीरफूकन  को अपनी सेना का सेना पति नियुक्त  किया , जो हर तरह के युद्ध में पारंगत थे , सेनापति नियुक्त  करते समय  राजा ने उन्हें सोने की तलवार भेंट  की।

राजा चक्रध्वज  सिन्हा ने धीरे धीरे पडोसी राज्यो के साथ मित्रता बढ़ानी शुरू की , मुग़लो  के साथ  की गयी संधियों को तोडना शुरू कर दिया , यह देखकर मुगलो के फोजदार फिरोज खान ने चक्रध्वज  सिन्हा पर दबाव बनाना  शुरू किया और कहा की अगर तुमने हमारी संधि तोड़ी तो इसके बहुत ही विनाशकारी परिणाम तुम्हे भुगतने होंगे।

इधर इन बातों की परवाह किये बिना ओटन गुहा प्रधानमंत्री और लासित वीरफूकन के साथ मिलकर पहले छोटी  जगहों पर जीत हासिल की , फिर अगस्त 1667 में गुवाहाटी पर ही फतह हासिल कर ली , और मुगलो की सेना को पीछे हटना पड़ा  तब राजा चक्रध्वज ने कहा था ,

" अब में दो मुट्ठी चावल सुकून से खा  सकूँगा ,

वहीँ दिल्ली में बैठा औरेंगजेब इस बात से बोखला गया , और 19  दिसंबर 1667  को उसने विशाल सेना जिसमे

5000  बंदूकधारी
1000  तोपे
नावो का बहुत बड़ा बेडा
30 ,000  पैदल सैनिक
15000  तीरंदाज
18000  तुर्की  घुड़सवार  थे , जिसकी कमान रामसिंह को देकर औरन्जेब  ने कहा  जाओ और जो हमारे सामने सर उठाये उसका सर कुचल दो ,
फ़रवरी  तक रामसिंह की सेना ने गुवाहाटी पहुँच कर उसपर फिर से कब्ज़ा कर लिया।  तब लाचित  ने कहा था ,

" यह बड़े दुःख की बात है की मेरे प्रधानसेनापति रहते मेरा देश भयंकर समश्या से झूझ रहा है , अपने राजा और प्रजा को कैसे इस संकट से दूर करूँ , मैं  में पूर्वजो की मान सम्मान की रक्षा कैसे करूँ , उसी दौरान रामसिंह ने कूटनीतिक चाल चलते हुए चक्रध्वज को सन्देश पहुँचाया की वीफकन  ने गुवाहाटी खाली करने की एवज में १ लाख रूपये लिए है , मगर यह चाल प्रधानमंत्री ने कामयाब ना होने दी , इसके पीछे की एक ठोस वजह थी , लाचित  का देशप्रेम और और उनका त्याग ,

मुगलो की युद्ध नीति  पर नजर रखने  के लिए  गुवाहाटी के नजदीक दुर्ग बनाने की ज़िम्मेदारी अपने मामा को दी , और कहा की एक ही रात में दुर्ग तैयार ऑन चाहिए , मामा ने कहा आप निश्चिन्त होकर सोइये , दुर्ग तैयार हो जाएगा, आधी रात को लाचित की बेचैनी बढ़ गयी वो रह नहीं पाए और दुर्ग का काम देखने चले गए , जाकर देखा तो मामा और मजदुर सो रहे थे , यह देखकर वीरफूकन  आग बबूला हो गए , और कहा तुम्हारी मातृभूमि , माँ बहनो की इज्जत खतरे में है और तूम सो  रहे हो  ??? एक ही वार में मामा की गर्दन अलग करते हुए कहा की देश से बड़ा मामा नहीं।  फिर खुद खड़े रहकर दुर्ग का काम पूरा करवाया, इसी वजह से मुगलो को जलयुद्ध करना पड़ा , जिसमे वो पारंगत नहीं थे , बल्कि बहुत ही कमजोर थे।

इधर युद्ध से पहले लाचित बहुत ही बीमार थे , राजा ने कहा आप युद्ध पर ना जाए , पर लाचित  गए और शुरू हुआ , हिन्दू और मुसलमानो के बीच  ---सरायघाट  का युद्ध

लाचित के पास सेना कम थी इसलिए आसाम की सेना पीछे हटने लगी तब लाचित ने सेना से कहा ---

' हे आसाम के वीर सेनिको , अगर तुममे कोई युद्ध छोड़कर  जाना चाहता है अवश्य  जाए , किन्तु मेरे राजा ने  मुझे दायित्व  दिया है , इसलिए जब तक मेरे अंदर प्राण बाकी है में लड़ूंगा , अगर मुग़ल मुझे बंदी बनाकर ले जाना चाहे तो बेशक ले जाए , तुम जाकर राजा से कह देना में उनकी आज्ञा का पालन करते हुए आखिरी वक़्त तक लड़ा , तब लाचित की सेना में ऊर्जा का तीव्र संचार हुआ , मुग़ल सेना परास्त हुई , इस युद्ध के एक साल बाद लंबी बीमारी के कारण इस वीर हिन्दू का देहांत हो गया , आज भी इतिहास में इनके जोड़ का कोई यौद्धा नहीं पैदा हुआ।  आसाम में हर साल २४ दिसंबर को लासित  दिवस बनाया जाता है।

रक्षा अकादमी के रक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ  पुरुस्कार का नाम भी वीरफूकन  के नाम से ही दिया जाता है।

इतिहास के इस वीर हिन्दू यौद्धा  को  मेरा शत  शत  नमन